Thursday, August 11, 2022
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गांव तक सड़क नहीं; गर्भवती को डोली में रखकर 3 किमी पैदल चले

आसिफाबाद  (तेलंगाना). हम आजादी का 75 वां जश्न मनाने जा रहे हैं। लेकिन दुर्भाग्य है कि देश में आज भी कुछ ऐसे गांव हैं जहां मूलभूत सुविधाएं ही मौजूद नहीं हैं। लोग उम्मीद के सहारे जी रहे हैं। हर पल वे खतरे के साये में रहते हैं। नेता सपने बेचकर चले जाते हैं। गांववालों की कोई सुनवाई नहीं है। ऐसी ही भीषण समस्या पर जर्नलिस्ट रमेश सोलंकी की ग्राउंड स्पेशल रिपोर्ट– कुमुराम भीम जिले के लिंगापुर मंडल में गांव तक सड़क नहीं होने के कारण करीब 3 किलोमीटर तक पेट दर्द से पीड़ित एक गर्भवती महिला को डोली पर लाद कर ले जाने की घटना सामने आई। लिंगापुर मंडल के लेंदीगुड़ा गांव की गर्भवती परचाकी राधाबाई को शाम को पेट में दर्द होने पर स्थानीय एएनएम अववाल ने एंबुलेंस को सूचना दी गई। गांव में एंबुलेंस ना आने के कारण  गांव वाले ही उसे डोली में रखकर  करीब तीन किलोमीटर तक चोरपल्ली गांव ले गए। वहां से एंबुलेंस उसे सिरपुर (यू) अस्पताल ले गई। जैनूर से उसी वाहन से अस्पताल ले जाया जा रहा था क्योंकि वहां चिकित्सा कर्मी उपलब्ध नहीं थे।रास्ते में भुरनूर गांव के पास एंबुलेंस में उसने एक बच्चे को जन्म दिया। मां और बच्चे के सकुशल होने पर परिजनों ने राहत की सांस ली। लेकिन करीब दो घंटे तक गर्भवती महिला ने मशक्कत की। ग्रामीण लेंडीगुडा गांव के लिए एक सड़क बनाने की मांग कर रहे हैं।

दुर्दशा : जान हथेली पर रखकर नाला पार कर रहे ग्रामीण

 आसिफाबाद जिले के केरामेरी मंडल में लक्मा पुर गांव में पुल व सड़क की सुविधा नहीं होने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आपात स्थिति के दौरान चिकित्सा देखभाल की कमी के कारण लोगों की जान जाने की घटनाएं भी होती हैं। भारी बारिश के कारण नाला उफान पर है  नतीजा यह है कि अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के जरूरी सामान और जांच के लिए लकमापुर के ग्रामीण अपनी जान हथेली पर लेकर नाले को पार कर रहे हैं।गांव के लोग कह रहे हैं कि लक्मापुर से मंडल केंद्र तक पहुंचने का कोई और रास्ता नहीं है या उन्हें खराब हालात में नाला पार करना पड़ रहा है।

ग्राम वासियों का कहना है कि हर साल जब बरसात का मौसम आता है तो हमारे गांवों का आवागमन बाधित हो जाता है, हमारी परेशानी शुरू हो जाती है। लकमापुर गांव की स्थापना के 50 साल बाद भी हमारे लकमापुर गांव की किसी को परवाह नहीं।चुनाव के दौरान नेता आते हैं और पुल बनाने का वादा करते हैं और चले जाते हैं। सूखे के मौसम में अस्थाई पुल होता है ग्रामीणों के लिए बनाया गया है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों के लिए, उन्हें अस्पताल जाने के लिए नाला पार करने के लिए कई परेशानियों का करना पड़ता है।ग्रामीण अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों से लकमापुर के ग्रामीणों की कठिनाइयों का जवाब देने की गुहार लगा रहे हैं और हमारे गांव के लिए एक पुल का निर्माण करें और एक स्थायी समाधान प्रदान करे।

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