भगवान गणेश से सीखें मैनेजमेंट के गुर,हमेशा आएंगे काम

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गणपति गजानंद का स्वरूप ही अपने आप में अनोखा है. इन्हें विघ्नविनाशक, विघ्नहर्ता भी कहा जाता है. बुद्धि और ज्ञान के देवता भगवान गणेश से कई सीख ली जा सकती हैं. यही वजह है कि इन्हें मैनेजमेंट गुरु भी माना जाता है. हम यहां पर ऐसे ही मैनेजमेंट सूत्र बता रहे हैं, जो हम गणेश जी से सीख सकते हैं और जिन्हें आजमाकर अपने जीवन को सफल बना सकते हैं.
बड़ा सिर, बड़ी सोच
गणेश जी का बड़ा सिर बड़ी सोच दर्शाता है. जो इंसान कामयाब होते हैं वे हमेशा बड़ी सोच रखते हैं. मैनेजमेंट में कहा जाता है थिंक बिग. सब कुछ समग्रता के साथ सोचें, उस पर मनन करें और फिर क्रियान्वित करें.
छोटी आंख, पैनी नजर
भगवान गणेश की आंखे शरीर की तुलना में छोटी हैं. ये पैनी नजर की ओर इशारा करती है. मैनेजमेंट का भी यही फंडा है कि किसी भी फैसले से पहले सभी पहलुओं पर नजर रखें. उद्देश्य पर नजर रखें तभी सफलता का स्वाद मिलेगा.

बड़े कान, ध्यान से सुनना
गणपति के कान विशालकाय होते हैं. बड़े होने के कारण वे हर छोटी-बड़ी बात को सुनने का प्रतीक हैं. अच्छे मैनेजमेंट के लिए भी यही जरूरी है, आप सभी की बात ध्यान से सुनें. ये तभी संभव है जब आप सचेत रहेंगे. जब आप दूसरे को सुनेंगे नहीं, उसके विचारों को जानेंगे नहीं, तब तक आप सफल प्रबंधक हो ही नहीं सकते.
बड़ी नाक, हालात भांपना
सूंड यानी सूंघने की क्षमता, अर्थात हर जगह सजग रहना. हर अच्छी और बुरी चीज को पहचानना. आपकी सफलता काफी हद तक इस बात पर ही निर्भर रहती है कि आपकी ग्रहण शक्ति और पहचानने की क्षमता अच्छी हो. गणपति की सूंड यही सिखाती है. आने वाले हालात को भांपना ही मैनेजमेंट का सबसे बड़ा गुण माना जाता है.
एकदांत, एक लक्ष्य
भगवान गणेश से यह भी सीखना चाहिए की किस तरह से मैनेजेंट बैलेंस बनाकर चलें. गणपति की नाक के पास उगा एक दांत, जिसके कारण वे एकदंत कहे जाते हैं, वह इस बात का द्योतक है कि मंजिल पर नजर ही एकमात्र लक्ष्य‍् .नाक की सीध में लक्ष्य पर निगाह. टारगेट ओरिएंटेड. यही मैनेजमेंट का भी फंडा है कि टारगेट पर निगाह रखें.

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