Saturday, May 21, 2022
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व्यापारियों को राहत,महाराष्ट्र सरकार लाई अभय योजना

 कोरोना प्रभावित कारोबारियों के लिए कर,ब्याज, विलंब शुल्क विधेयक पारित

वेब डेस्क. मुंबई.. कोरोना के चलते पिछले 2 साल में व्यापारियों को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। छोटे व्यापारी तो खत्म ही हो गए। लॉकडाउन ने व्यापारियों की कमर तोड़ दी है। गरीबी में आटा गीला। कर्ज लेना पड़ रहा है लेकिन धंधा नहीं हो रहा, ऊपर से दुनियाभर के टैक्स। 

व्यापारियों को राहत,महाराष्ट्र सरकार लाई अभय योजना

इसलिए, आर्थिक तंगी के चलते कर न चुका पाने वाले व्यापारियों को राहत देने महाराष्ट्र सरकार अभय योजना लाई है। महाराष्ट्र कर,ब्याज,दंड अथवा विलंब शुल्क’ विधेयक को सोमवार को विधानमंडल के दोनों सदनों में बहुमत से पारित कर दिया गया। 

इसके तहत जीएसटी आने के पहले के बकाया 10 हजार रुपए तक के कर माफ किए गए हैं जबकि इससे ज्यादा बकाया पर भी बड़ी छूट दी गई है। 

उपमुख्यमंत्री व वित्त मंत्री अजीत पवार ने कहा है कि अभय योजना को ऑनलाइन और पूरी तरह पारदर्शी ढंग से लागू किया जाएगा। कारोबारियों के लिए ये योजना बहुत मददगार साबित होगी।

योजना की खास बातें

  • अभय योजना के तहत 1 अप्रैल 2022 से 30 सितंबर 2022 तक बकाया रकम भरी जा सकती है।
  • जीएसटी आने के पहले के 10 हजार रुपए तक का बकाया रकम पूरी तरह माफ।
  • पहली किस्त के रूप में 25 फीसदी रकम 30 सितंबर 2022 तक भरनी होगी। बाकी रकम अगले नौ महीनों में तीन किस्तों में भरी जा सकेगी।
  • अभय योजना का लाभ लेने के लिए तय समय पर एक साथ रकम भरनी होगी।

20 फीसदी रकम भरने पर 80 फीसदी माफ  

जिन कारोबारियों की बकाया रकम 1 अप्रैल 2022 तक 10 लाख रुपए या उससे कम है उन्हें अविवादित कर, विवादित कर, दंड का अलग हिसाब किए बिना बकाए का सिर्फ 20 फीसदी भरने का विकल्प दिया जाएगा। 20 फीसदी रकम भरने पर 80 फीसदी रकम माफ कर दी जाएगी।

 राज्य के 2 लाख 20 हजार कारोबारियों को इसका फायदा होगा। जो कारोबारी इस योजना का लाभ नहीं उठाएंगे या इसके लिए पात्र नहीं होंगे उन्हें अविवादित कर में कोई छूट नहीं दी जाएगी।योजना का लाभ न उठाने वाले कारोबारियों को अविवादित कर पूरा भरना होगा। 

1 अप्रैल 2005 से 30 जून 2017 के बीच विवादित कर का 50 फीसदी,15 फीसदी ब्याज,5 फीसदी जुर्माना और 5 फीसदी विलंब शुल्क भरना होगा। इसके बाद बाकी की रकम माफ हो जाएगी। जिन कारोबारियों की बकाया रकम एक वित्त वर्ष के दौरान 50 लाख रुपए से ज्यादा है ऐसे कारोबारी  चार किश्तों में कर भर सकेंगे। 

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